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हाईकोर्ट ने एनसीएल की भूमियो पर तथाकथित अवैध अतिक्रमण के ध्वस्तीकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट करने का दिया  निर्देश,मचा हड़कंप

हाईकोर्ट ने एनसीएल की भूमियो पर तथाकथित अवैध अतिक्रमण के ध्वस्तीकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट करने का दिया निर्देश,मचा हड़कंप

 

हाईकोर्ट ने एनसीएल की भूमियो पर तथाकथित अवैध अतिक्रमण के ध्वस्तीकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट करने का दिया  निर्देश,मचा हड़कंप


उर्जांचल मे एनसीएल की भूमियो पर निवासरत् आबादी के उपर बेदखली का संकट, बेदखल किये जाने हेतु हाईकोर्ट मे पीआईएल दाखिल।

:- उर्जांचल मे स्थित नार्दर्न कोलफिल्डस लिमिटेड की ककरी, बीना, खडिया, कृष्णशिला, दुध्दीचुंआ कोयला खदान परियोजनाओ हेतु CBA(A&D) Act-1957 के प्राविधानानुसार अधिग्रहित की गयी भूमियो मे से डिनोटिफिकेशन हेतु प्रस्तावित भूमियो पर बसे मूल किसान व डिनोटफिकेशन हेतु कोयला मंत्रालय को प्रेषित प्रस्ताव के आधार पर अधिग्रहण के समय राजस्व अभिलेखो मे दर्ज व्यक्तियो से क्रय कर/काबिज आबाद हजारो परिवारो व एनसीएल की भूमियो पर निवासरत् ऐसे परिवार जिन्हे अधिग्रहण के समय पुर्नवास-पुर्नस्थापन लाभ/पुर्नवास प्लाट देकर विस्थापित कर अन्यत्र पुर्नवासित नही किया गया है तथा उनके द्वारा अपना पुर्नवास पुर्नस्थापन लाभ मांगे जाने पर एनसीएल द्वारा कहा जाता है कि ऐसी भूमियो की उसे आवश्यकता नही है तथा यथास्थिति बरकरार है के साथ-साथ एनसीएल की अधिग्रहित भूमियो पर कब्जा कर निवासरत् अनपरा-शक्तिनगर परिक्षेत्र के हजारो परिवारो के उपर बेदखली तथा उनके मकानो को ध्वस्त किये जाने का संकट मंडरा रहा है। एनसीएल की भूमियो पर निवासरत् व आबाद ऐसे परिवारो जिनमे विस्थापित परिवार व अन्य परिवारो के मकानो व व्यावसायिक प्रतिष्ठानो को अवैध कब्जा बताते हुये एनसीएल द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत् उपलब्ध कराई गयी सूचनाओ को आधार व स्त्रोत बनाकर राघेन्द्र प्रताप सिंह निवासी जयन्त, सिंगरौली(म.प्र.) द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद मे जनहित याचिका दाखिल कर एनसीएल की डिनोटिफिकेश हेतु प्रस्तावित भूमियो व अन्य भूमियो पर निवासरत् विस्थापित परिवारो समेत अन्य हजारो परिवारो के मकानो व दुकानो को अतिक्रमण बता ध्वस्त किये जाने की मांग की गयी थी। प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुये हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा सम्बन्धितो को नोटिस जारी किया गया जिसके उपरान्त एनसीएल की ओर से न्यायालय मे जवाब दाखिल कर अपना पक्ष रखा गया जिसके उपरान्त मामले की सूनवाई करते हुये न्यायालय द्वारा दिनांक 19 सितम्बर, 2022 को सूनवाई करते हुये एनसीएल की भूमियो से अतिक्रमण हटाये जाने/बेदखली व ध्वस्तीकरण के मामले मे राज्य सरकार द्वारा एनसीएल के प्रति सहयोगात्मक रवैया नही अपनाने तथा शिथिलता बरते जाने पर नाराजगी जताते हुये राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश जारी किया था जिसके उपरान्त पुनः 10 अक्टुबर 2022 को मामले की सूनवाई के दरम्यान राज्य सरकार की ओर से प्रकरण पर विस्तृत जवाब दाखिल किये जाने हेतु समय मांगा गया है जिसके उपरान्त मुख्य न्यायाधीश के अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सूनवाई हेतु 14 दिसम्बर, 2022 की तिथि निर्धारित की है। बताते चले कि इस प्रकरण मे याचिकाकर्ता की ओर से एनसीएल द्वारा उपलब्ध कराई गयी अतिक्रमणकारियो की सूची को आधार व स्त्रोत बनाकर दाखिल जनहित याचिका मे आरोप लगाया है कि एनसीएल द्वारा अतिक्रमणकारियो की आधी-अधुरी सूचना उपलब्ध कराई जा रही है तथा अतिक्रमण से प्रभावित क्षेत्र को कम दर्शाया जा रहा है वही दुसरी ओर एनसीएल के सुरक्षाकर्मियो, स्थानीय पुलिस के संरक्षण व सांठगांठ से बडे पैमाने पर एनसीएल की जमीनो पर कब्जा कर एनसीएल से चुराई गयी कोयला, डीजल, कबाड का धन्धा किया जा रहा है साथ ही साथ शराब आदि के विभिन्न प्रतिष्ठानो को चलाये जाने हेतु सरकारी लाईसेंस तथा अवैध अतिक्रमणकारियो को शासन स्तर पर वैध बिजली के कनेक्शन दिये गये है वही दुसरी ओर अतिक्रमण कर बसी बस्तियो मे विकास के नाम पर करोडो रुपये बहाये जा रहे है जिससे सरकारी भूमि की लुट को बढावा मिल रहा है तथा शासकीय धन का दुरुपयोग भी हो रहा है। अब तक एनसीएल की भूमियो पर अतिक्रमण के मामले मे एनसीएल हेतु किये गये भूमि अधिग्रहण मे भूमि एवं भवन के अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्ति दुर थे परन्तु इस याचिका के दाखिल होने के बाद अतिक्रमण के मामले मे बाहर से आकर दशको से आबाद परिवारो के साथ साथ विस्थापितो पर भी बेदखली व ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है।इस मामले पर विस्थापित नेता पंकज मिश्रा का कहना है कि एनसीएल द्वारा गलत तरीके से एनसीएल के ऐसे विस्थापितो जो डिनोटिफिकेशन हेतु प्रस्तावित भूमि अथवा अपने भूमि व भवनो का प्रतिकर, पुर्नवास लाभ प्राप्त नही होने के कारण यथावत है को अतिक्रमणकारियो के रुप मे सूचीबध्द कर सूचना उपलब्ध कराई गयी है जिसे याचिका मे अतिक्रमणकारियो को दर्शाने का मुख्य आधार बनाया गया है वही दुसरी ओर याचिका मे डिनोटिफिकेशन हेतु प्रस्तावित भूमियो पर आबाद अन्य हजारो परिवारो को भी अवैध अतिक्रमणकारी बताया गया है जो त्रुटिपुर्ण है व इसके अतिरिक्त शासन के हस्तक्षेप के बाद अनपरा नगर परिक्षेत्र मे विभिन्न परियोजनाओ की भूमि पर निवासरत् आबादी को विनियमित किये जाने की मांग पर जिला प्रशासन द्वारा कई बैठके आयोजित की गयी है व मामला अभी विचाराधीन है। श्री मिश्रा ने बताया कि इस प्रकरण मे उनके द्वारा मामले मे पक्षकार बनकर निवासरत् आबादी का पक्ष पुरजोर तरीके से मय साक्ष्य व अभिलेख रखा जायेगा और उर्जांचल मे ऐसी भूमियो पर निवासरत परिवारो के आशियानो को उजाडने के नापाक मंशुबो को कामयाब नही होने देंगे।

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